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Providing Healthy Diet & Ending Food Wastage – World Food Day Celebrations by Prithvi Innovations at Vivekananda Polyclinic, Lucknow

 

Press Release

On the occasion of ‘World Food Day’, 16th October 2019, Annapurna Rasoi was organized by Prithvi Innovations for Patients’ attendants staying at Rain Basera of Vivekananda Polyclinic & Institute of Medical Science, Lucknow with kind collaboration and support of Vivekananda Polyclinic & Institute of Medical Science, Luknow and Vidisha Trust.

This programme was a part of Prithvis Annapurna Yagya, an initiative by Prithvi Innovations to motivate and mobilize one and all to minimize wastage of food of any kind, at any place and also to provide healthy food to the needy and hungry people, in line with Sustainable Development Goals (SDGs) number 2-zero hunger and goal No. 12 .i.e. Responsible Consumption and Production (RCP).

Nutritious Tehri was served to all Patients attendants by Swami Muktinathanand, the Secretary of the Institute along with other team member from Prithvi Innovations and Vidisha Trust, after offering it to Maa Durga.

Swami Muktinathanand the Secretary of the Institute shared his valuable thought on the occasion and requested everyone to respect food and not to waste it. “अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात्” “Know that Food is God Himself’, so said that Vedas. We, therefore, should treat food as divine and essential as God.”

Mrs. Anuradha Gupta, Founder Prithvi Innovations, thanked everyone for joining hands in Annapurna Yagya. She further informed about the various activities, workshops and food donation drives being conducted by Prithvi Innovations in the coming days around the theme of ‘Healthy Diet’, for this year’s World Food Day. Along with Sri Ratnesh and Namita, Prithvi’s Team sensitized everyone to separate their green kitchen wastes and dry wastes so that the waste can be converted into useful resource like compost.

With the help of Sri Prem Shankar from Vidisha Trust and kitchen staff. Prithvi Innovations demonstrated how the green vegetable wastes and banana peels (fruit waste) can be scientifically converted into rich compost with complete ease. Moreover, everybody was requested to reduce the use of single use plastics and polythenes and to collect them separately in dry garbage bags. Towards the end everybody was advised to go for local, seasonal natural food instead of processed and junk food.

विश्व खाद्य दिवस, 16 अक्टूबर 2019 के अवसर पर, विवेकानंद पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के रेन बसेरा में मरीजों के परिचारकों के लिए पृथ्वी इनोवेशन्स व विदिशा ट्रस्ट के सहयोग से अन्नपूर्णा रसोई का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम पृथ्वी अन्नपूर्णा यज्ञ का एक हिस्सा होने के साथ ही साथ पृथ्वी इनोवेशन्स की एक पहल भी थी, जिसमें किसी भी स्थान पर किसी भी तरह के भोजन के अपव्यय को कम करने के लिए प्रेरित करने व जरूरतमंद भूखे लोगों को स्वस्थ भोजन प्रदान करने की एक पहल थी। पिछले वर्ष सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संख्या 2-“शून्य भूख” था और मौजूदा वर्ष का लक्ष्य संख्या 12 –“’जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन (आरसीपी)” है।

माँ दुर्गा व पावन त्रिदेवों श्री ठाकुर, माँ शारदा एवं स्वामी विवेकानन्दजी को भोग अर्पित करने के पश्चात, पृथ्वी इनोवेशन्स और विदिशा ट्रस्ट के टीम के सदस्यों के साथ-साथ विवेकानंद पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के सेवकों द्वारा सभी मरीजों के परिचारकों को निःशुल्क पौष्टिक तहरी परोसा गया।

संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने इस अवसर पर अपने मूल्यवान विचार साझा किए और साथ ही साथ यह भी निर्देश दिया कि सभी को भोजन का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी हालात में अन्न को बर्बाद नही करना चाहिए जैसा कि कठोपनिषद में कहा गया है “अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात्’’, अर्थात भोजन स्वयं भगवान ही है’ इसलिए, हमें भोजन को ईश्वर के समान और आवश्यक मानना चाहिए।”

श्रीमती अनुराधा गुप्ता, संस्थापक पृथ्वी इनोवेशन्स, ने अन्नपूर्णा यज्ञ में शामिल होने के लिए सभी को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्व खाद्य दिवस हेतु ’हेल्दी डाइट-स्वस्थ आहार’ की थीम को चुना गया। इसलिए आसपास आने वाले दिनों में पृथ्वी इनोवेशन्स द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों, कार्यशालाओं और फूड डोनेशन ड्राइव के बारे में बताया जायेगा। श्री रत्नेश और नमिता के साथ, पृथ्वी इनोवेशन्स की टीम ने अपने हरे रसोई कचरे और सूखे कचरे को अलग करने के लिए सभी को संवेदनशील होना चाहिए ताकि कचरे को खाद जैसे उपयोगी संसाधन में बदला जा सके।

श्री प्रेम शंकर जी, विदिशा ट्रस्ट और रसोई के कर्मचारियों एवं पृथ्वी इनोवेशन की मदद से दिखाया गया है कि कैसे हरी सब्जियों के कचरे और केले के छिलके (फलों का कचरा) को वैज्ञानिक रूप से पूरी आसानी के साथ समृद्ध खाद में बदला जा सकता है। और सभी से अनुरोध किया गया कि वे एकल उपयोग प्लास्टिक और पॉलीथीन के उपयोग को कम करें और उन्हें सूखे कचरे के थैलों में अलग से इकट्ठा करें। अंत में हर किसी को संसाधित और जंक फूड के बजाय स्थानीय, मौसमी प्राकृतिक भोजन के उपयोग की सलाह दी गई।

(स्वामी मुक्तिनाथानन्द)
सचिव

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